रविवार, 25 अगस्त 2019

Poet

कल भी वक्त मेरा था आज भी वक्त मेरा है 





 कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है 
जीवन में न कुछ तेरा है ,न कुछ मेरा है 
खली हाथ आये थे खली हाथ जाना है 
किश्मतों के मारे थे , न किसी के सहारे थे 
कल तो तेरे दिन अच्छे थे आज तो मेरे है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
हम तो खुद से गिर कर खड़े हो जाते है 
न किसी के कल सहारे थे  न आज किसी के सहारे है 
किस्मतों के लेख को क्या माने हम 
हम तो खुद की किस्मत लिखते है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
न कोई कहने को अपना कोई न कोई कहने को पराया है 
आँख खुली तो पता चला की ये तो सब सपना है न कोई यहाँ मेरा है 
न कोई जंजीरों से मेरे सपने न बंधे हो 
बेपरवा होके आसमान के तारों को छुए हो 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
अपनो की क्या बात करते हो आप 
समय पर साथ छोड़ जाता है अपना साया है 
न कोई हो धर्म का बंधन  सबको अपना मानकर हम तो जीते है 
हम तो बस हमेशा सर उठाकर जीते है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है

***************************-----------------------***************************




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Jamin se ashman tak

जमीं से उस  आसमाँ तक , मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  जमीं से उस  आसमाँ तक ,  मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  शुरू से लेकर अंत तक ,  त...