घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
चाहे बिजलियाँ कड़क रही हो
न रुके रुक नहीं न झुके झुके नहीं
अपने पथ पर चलता रहे
चाहे आये कई अड़चने
जैसे फूलों पर होते है कांटे बुने
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
होकर निस्चल निष्फलक हर तलक
लेकर अपनी राहो की अड़चनों का सबब
यही जिन्दगी के गीत है सभी गाते
जिंदगी जीने की कला है हमको सिखाते
यही तो हमें अपने हमेशा बताते
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
हर तरफ दिखे धुआं-धुआं सा
नजर में आये धुंदला -धुंदला सा
अपने पथ पर चलता रहूं
ये गीत आप सभी को सुनाता रहूं
गमो में भी मुस्कुराता रहूं
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
जिंदगी के मस्तियाँ बचपन की ये गलियां
चंद्रशेखर ,भगत सिंह ,विवेकानंद
जिनसे निकले कई हस्तियां
मिटे न मिटाये ये है हमारे देश की हस्तियां
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
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