शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

Jamin se ashman tak

जमीं से उस  आसमाँ तक , मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 


जमीं से उस  आसमाँ तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
शुरू से लेकर अंत तक ,
 तेरा पीछा करूँगी  वहां तक 
जब तक ये साँस चलेगी तब तक, 
ये जूनून जिन्दा रहेगी  आदि से अंत तक 
 जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
तुमको  हांसिल करने के  उस अंतिम वक्त तक 
मेरा वक्त रहेगा तब तक 
सब कुछ हाँसिल न कर लूँ तब तक 
मेरा ये प्रण रहेगा तब तक 
जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
ये जिंदगी रहेगी तब तक 
मेरी एक मंजिल पैदा होगी तब तक 
आज है ये जिंदगी शायद न बचे कल तक 
बस तो ये जूनून रहेगा उस आखरी तड़फ  तक 
जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
जिंदगी मेरी बची रहे दूसरे का  दुःख के अंतिम घड़ी  तक 
खुदा के रहमे करम है हम सब तक 
इस  रात की समां बुझने तक 
इस जीवन के अंतिम सासों तक 
जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 



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बुधवार, 4 सितंबर 2019

Time For play our

वक्त का खेल पुराना है ,
खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 



वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

क्या लेकर आये थे क्या लेके जाना है

 हमेशा मुस्कुराते रहना है

 वक्त हर जख्मों को भर देगा बस चलते रहना है

 न तेरा कुछ न मेरा कुछ है 

यहाँ एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाना है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

किसी का दिल न दुखाना है 

जो अच्छा है उस काम को  करते जाना है 

जीवन को सड़े बीज मिले या अच्छे 

खुशी से बीज बोते जाना है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

भागवत ,बाइबल ,कुरान इनका मतलब

 किसी को न अलग करना है 

किसी को नीच न माने सबको एक समझना है 

हम एक ही खुदा के बन्दे है 

सदा एक साथ एक ही रहना है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

खुदा भी कहता है मैंने सबको एक माना है 

फिर न जाने क्यों रंग रूप मजहब का यह मैंने भेद बनाया है

 सबको एक और एक ही इंसान बनाया है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

खुद को यूँ न अलग समझ कर चलना है 

सब में भाई चारे की भावना पैदा करना है 

खुशी से एक साथ जिंदगी को हँसते हुए जीना है 

सबको एक और एक ही इंसान बनाया है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

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सोमवार, 2 सितंबर 2019

Start first With the ray of sun

सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 





सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
जिंदगी की शुरुवात एक नयी सोच के साथ 
 है राहें नए  पर नयी मंजिल के साथ 
सुबह कि शुरुवात करो एक नयी उमंग के साथ
सोचो अच्छा तो होगा अच्छा सा 
सीधा सा रास्ता हो  सच्चा सा 
 सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
सबका पकड़ के हाथों में हाथ
बढ़ते रहना सभी को लेकर के साथ 
बनाना है हम सबको अपना इतिहास  
पूरा होगा तभी जब होगा सबका साथ 
सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
शामिल रहो  सदा सबके दुःख -सुःख में साथ 
यूँ ही चलते रहना है एक दूसरे के साथ 
एक दूसरे को बताएँ हम हमेशा है तेरे साथ 
हमेशा चलते रहेंगे पकड़ कर के एक-दूसरे का हाथ 
कैसी भी मुश्किल की घड़ी आ जाये न छोड़ेंगे तेरा साथ  
सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
अपने इरादों के हौसलों से छू लेंगे आसमानों को 
न डरेंगे इस जहाँ के इंसानों को 
चलते रहेंगे हमेशा इस तरह 
ये जहाँ रहे चाहे कैसे भी किस तरह 
सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 




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शनिवार, 31 अगस्त 2019

Poet For Girls

हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी 




हर घर का चाँद है बेटी घर का सम्मान है बेटी
घरों में खुशियां लाती है बेटी
माँ बाप का सम्मान करती है बेटी
घर में हो बेटी तो खुशियोँ से भरा रहता है घर सारा
उनके बिना  घर सुना हो जाता है सारा
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
अपने परिवार  गौरव बढ़ाती है बेटी
उस कुदरत का अनमोल तौफा है बेटी
घर को धन धान्य रखती है बेटी
जिस घर में हो बेटी
खुशियों को समेटे रखती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
माँ बनकर कभी बच्चों को सिख देती है बेटी
तो कभी शिखिका बनकर ज्ञान की बात बताती बेटी
कभी  बेटी बनकर अपने माँ बाप की सेवा करती है बेटी
तो कभी बहु बनकर के घर को सवाँरती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
बेटी है तो सुन्दर है जग सारा
इनके बिना नहीं तो क्या है यहाँ प्यारा
सच कहें तो नौ देवियों का प्रतिरूप है बेटी
इनको करो सदा सम्मान
दो छोटे बड़े सभी को ज्ञान
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
इनकी करो सदा सुरक्षा
तभी तो अपना धरती होगा अच्छा
घर को स्वर्ग बनती है ये बेटी
फूलों की तरह घर को महकाती है बेटी
भवरों के जैसे घर में गुनगुनाती है बेटी 
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
सदा करती है ये सभी का सम्मान
सबको मानती है ये एक समान
अन्नपूर्णा की मूरत होती 
 सरस्वती की सुरत  होती है बेटी
सच कहें तो खुशियों को संजोती है ये बेटी
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी  


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बुधवार, 28 अगस्त 2019

Article Khud ki takdir apne hath me

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में 




खुद की तक़दीर अपने हाँथ में

 मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

रहती वो हमेशा  मेरे साथ में 

जिसको मैंने ढूंढा  इधर- उधर  बातों ही बातों मैं 

वो तो मिला मुझे मेरे साथ में 

इनको कर लू में अपने मुठी में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में

 मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

न हो भले कोई मेरे साथ में 

अपने तक़दीर को भी लिख दूंगा अपने इस हाथ में 

न किसी की सुनता करता हूँ अपने आप की में 

चाहे वो तक़दीर से भी छीन लूँ 

जो छिपा ले इन ऊंच आश्मान में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में 

मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

तक़दीर कभी नहीं लिखा रहता है हाथों की लकीरों में 

वो तो छिपा के हम रकते है अपने मेहनत  की लकीरों में 

जो चाहते हो  उसे हांसिल कर सकते  तुम भरोसा रखो इन हाँथों में 

न बह जाना कभी किसी के जस्बातों में 

खुद की सुनना खुद की करना 

न खो जाना किसी के बात में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में 

मेरी मंजिल है मेरे साथ में 


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मंगलवार, 27 अगस्त 2019

Poet New

हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती






हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
ये फासले भी हो जाते कम अगर तुम सामने होती
आपसे  जुदा  होने का गम न होती  
न मैने कुछ भी  उस रब से माँगा 
बस इतना माँगा  तुम मेरे साथ होती
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
हम दोनों की एक मुलाकात होती 
काश तुम मेरे पास होती 
हम दोनों के मिलन  में रिम -झिम सी बरसात होती 
हम दोनों में कुछ ऐसी बात होती 
मैं आपके आँखों में देखूँ ,आप मेरे आँखों में खो जाती 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
मेरे हाथों में तेरा हाथ होता 
हम दोनों का  रिश्ता  सदा साथ होता 
काले -काले बादलों में कहीं हम खो जाते 
तेरे मेरे सपनो में हम खो जाते 
तेरे पलकों तले हम चैन यूँ ही  सो जाते 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
बेकरारी इस कदर बढ़ गयी तुझसे मिलने को की 
तेरी तो हमको परछाई भी नजर कभी नहीं आती 
तुझसे हम जो दूर हुए 
हम अपने  गुरुर से मजबूर हुए 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
न जाने ये कैसी मज़बूरी थी 
तुझसे इतनी मेरी दुरी थी 
न मैंने खुद को जाना 
न तुमको कभी मैंने नहीं  पहचाना 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
हम दोनों के रिश्ते थे इतने नाजुक 
की चंद पल भी ठहर न पाए 
तुझसे दूर होने का गम हमेशा रहेगा 
क्योंकि कभी सायद हम ही तुमको  समझ नहीं पाए 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती


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रविवार, 25 अगस्त 2019

Poet

कल भी वक्त मेरा था आज भी वक्त मेरा है 





 कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है 
जीवन में न कुछ तेरा है ,न कुछ मेरा है 
खली हाथ आये थे खली हाथ जाना है 
किश्मतों के मारे थे , न किसी के सहारे थे 
कल तो तेरे दिन अच्छे थे आज तो मेरे है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
हम तो खुद से गिर कर खड़े हो जाते है 
न किसी के कल सहारे थे  न आज किसी के सहारे है 
किस्मतों के लेख को क्या माने हम 
हम तो खुद की किस्मत लिखते है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
न कोई कहने को अपना कोई न कोई कहने को पराया है 
आँख खुली तो पता चला की ये तो सब सपना है न कोई यहाँ मेरा है 
न कोई जंजीरों से मेरे सपने न बंधे हो 
बेपरवा होके आसमान के तारों को छुए हो 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
अपनो की क्या बात करते हो आप 
समय पर साथ छोड़ जाता है अपना साया है 
न कोई हो धर्म का बंधन  सबको अपना मानकर हम तो जीते है 
हम तो बस हमेशा सर उठाकर जीते है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है

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शनिवार, 24 अगस्त 2019

love poet

रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि 


रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि तेरे चाहत में हम इतने डूबे गए की खुद को पहचानना बाकि है तेरे जाने का गम इतना था की, दिन भी हमें रात लगने लगती है यह वक्त मेरे बस का नहीं तो , तुझे अपना भी बनाना अभी बाकि है तुझसे मेरी सुबह हो और तुझसे मेरी शाम होना बाकि है  रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि न खुद का  फ़िक्र था कभी,  बस मेरी चाहत  दिल में थी दबी जब मेरे पास थी वो पर केह न पाया कभी तेरे जाने का गम तब भी था तेरे जाने का गम आज भी है रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि पर तेरे लिए प्यार तब भी था बाकि और तेरे लिए प्यार आज भी बाकि तेरे प्यार का आलम ये है की हर पल थोड़ा जीने की आस आज भी है बाकि थोड़ा तेरे साथ जीने की हशरत कल भी था  थोड़ा बाकि रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि 

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बुधवार, 21 अगस्त 2019

ARTICLE JIVAN ME RAHEN KHUD BANATI HAI

thou esa jkgsa [kqn cukrh gSaA




जीवन में राहें खुद बनाती है 
मंजिल भी खुद ढूँढ लेती है  
रास्ते  चाहे कैसे भी होती है ,अपने उड़ने की ताकत ढूँढ लेती है  
रास्ते कैसे भी क्यों न हो, रास्ते की हमराही ढूँढ लेती है  
खुद पर हो अगर fo”okl तो  मंजिल भी विनर ढूँढ लेती है 
जीवन में राहें खुद बनाती है
जिसको मंजिल की तलाश हो ,उसे नींद कभी न आती है 
कड़ी मेहनत से ही मंजिल मिलती 
नहीं तो बिना मेहनत कुत्ते को भी रोटी नहीं मिलती है 
अपने इरादे रखो नेक ,मंजिल भी साथी ढूँढ लेती है 

जीवन में राहें खुद बनाती है


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रविवार, 18 अगस्त 2019

Din par din dhalti rahi ..

दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही





दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही
न वो आये ,न उनकी खबर आयी
अँधेरे में पड़ी जिन्दगी भी, उजाले की तलाश करती रही
अपनों को क्या देखूँ  में ,खुद को हमेशा निहारती रही
न जाने कब वो आयेंगे, ये सोचकर खुद को मैं सवाँरती रही
दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही
जब वो गए मानो ,जीने की वजह भी साथ गयी
न लौट कर आये वो ,न उनकी कोई सन्देश आयी
घर पर राह तकते ,साँसें हमेशा दम तोड़ती रही
उनके एक बार मिलने प्यास में ,साँसें थोड़ी  रूक सी गयी
दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही
सास ससुर की सेवा करूँ, इनके चरणों में पड़ी रही
आखरी वक्त में भी, बेटे को देखने की उनकी आस बढ़ती रही
सोंचे न होंगे वे कभी पास मेरे ,उसकी परछाई भी न होगी
यादें होंगी उनकी  साथ मेरी  पर ,ऑंखें उनको  देखने को तरसती रही 
 दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही

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शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

Suraj se maine chamakna sikha .

सूरज से मैंने चमकना सीखा फूलों से महकना सीखा 








सूरज से मैंने चमकना सीखा , फूलों से महकना सीखा 
भौरों से गाना सीखा , पंछियों से चहकना सीखा 
वनों से मैंने सुंदरता सीखा 
धर्मों से सबको एक करना सीखा 
शिक्षा से मैंने ज्ञान सीखा 
जिंदगी में काँटों से भरे राहों को पार करना सीखा 
पानी के बहाव से मैंने हमेशा बहते रहना सीखा 
मिटटी से जीवन को सृजन करना सीखा 
प्रकृति से मैंने बदलाव सीखा 
हवा से मैंने हमेशा गतिशील होते रहना सीखा 
आग से मैंने अपने अंदर की बुराई को जलना सीखा 
बारिश से मैंने जिंदगी की अच्छाई से जीवन को सींचना सीखा 
बड़ों से मैंने अपने से अनुजों को प्रेम करना सीखा 
जीवन के सफर में गिर -कर उठना सीखा 
आसमान  ऊँचाई से मैंने ,हमेशा ऊपर उठना सीखा 
हार कर जिंदगी से मैंने जीतना सीखा 
गम से भरे आँसुओं से मैंने फिर से हँसना सीखा 
रंगों से जीवन के विरान भरे जिंदगी  को रंगना सीखा 
समय से मैंने अपने आप को बदलना सीखा 
सागर से मैंने हर मुश्किलों को पार करना सीखा 

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मंगलवार, 13 अगस्त 2019

Guruvar hame do yah gyan .

गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान 


























गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान
तेरे ही चरणों में है पूरे चारों धाम
आपका आशीष पाकर बने, परमहंश और विवेकानंद जैसे महान 
दो हमें यह मूल मंत्र दो हमें ज्ञान 
माता पिता को ही अपना माने भगवान 
इनकी सेवा में लगा रहे हमारा सदा ध्यान 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान
इस धरा पर तीनों  ही ऐसे है ,जिनके चरणों में ही समाये तीनों लोको के भगवान 
गुरु और माता-पिता इस धरा के, सच्चे प्रतिक है भगवान 
सुबह उठ-कर करो इनका ध्यान 
उसके पश्चात् करो, अपना नित काम 
हर काम शुभ हो जायेगा ,इनका लेके नाम 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान  
जो इनको न समझे अपना  मान  सम्मान 
जरा सा दिल का भी कहना मान 
इनको भी थोड़ा पहचान 
इनसे ही है सोहरत तेरी ,इसी ही छिपी गरिमा तेरी 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान  
माता - पिता और  गुर  की  सेवा ,  का करो तन- मन से ध्यान 
कहाँ ढूंढता रहता  है दर -बदर  घर पे ही रहते है सदा तेरे भगवान 
माँ को देवी मानो पिता को देव और, गुरु है ऋषियों के अंशदान 
इनसे ही दिक्ष्या पाकर बने सूरदास और संत कबीर जैसे महान 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान  

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रविवार, 11 अगस्त 2019

Jeevan ek Safar .

                       जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर




जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
इधर -से -उधर भटकते रहें  ,मन ले जाये जिधर 
चलते रहना न रुकना ,यही है जिंदगी का सफर
होकर -बेखबर - बेअसर  ,चलते रहो मंजिल हो जिधर 
जिंदगी से सिखो यह सबक 
न रुकना कभी ,मुश्किलें आ जाये जब आप पर 
जिंदगी लेती है इन्तेहाँ हमेशा 
कौन कैसा  इसकी  हमें है ,हर पल की खबर
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
मुश्किलों से जो घबराओगे 
मंजिल न आएगी ,तुम्हें कभी नजर 
भटकाना इसका काम यही 
सबकी खबर ले यही,घर -घर करके सफर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
कंकड़ मिले या पत्थर, करते रहो इसमें  सफर 
राहों में भी मिलेंगे फूल और कभी पत्थर 
 जीवन में कभी सुःख आएंगे कभी दुःख 
इन सभी से लड़ने के लिए, सदा रहो तत्पर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
दुःख भी आता ग्रहण की तरह कुछ पहर 
ये भी हट जाता है ,कुछ -समय  कुछ- पहर 
कब कहाँ क्या हो जाये, इसकी नहीं किसी को खबर 
कभी -इधर तो कभी -उधर ,जीवन का  यही तो है सफर 
मुश्किलों से लड़ने  के लिए ,रास्ते पे खड़े रहो डटकर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
इनसे लड़ो सदा हँसकर 
जिंदगी का यही उसूल चलते रहो हमेशा  मुस्कुराकर 
आज यहाँ है न जाने ,कल हो किधर 
जीने का रास्ता ही ,बदल जायेगा 
इतना भरोशा  रख ले ,जरा सा खुदपर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
खुशियाँ  कदम चुम लेंगी ,तुम्हारे जब दर  पर 
सावन की बारिश की तरह, बरस पड़ेंगे तुम पर 
कुछ न आता था हमें नजर 
न कोई मंजिल थी, सोचते थे जाएँ किधर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
बिना कोई मंजिल के, चलते थे रास्ते पर 
ऐसा लागत था हमें सच में ,हम तो है एक  पत्थर 
जो भटक रहा है, बिना मंजिल के इधर- से- उधर 
जब हम उनसे रूबरू हुए तो, हमने सोचा चलते रहना है सदा इसपर 
जब तक हमें मंजिल मिल न जाये इस पथ -पर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर    .........,,,,    



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शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

Hamesha mar mar ke Jiti rahi .

  हमेशा मर-मर के जीती रही ,अपने ही घर में मै सिमट कर सोती रही



हमेशा मर-मर के जीती रही
अपने ही घर में मै सिमट कर सोती रही
आजादी क्या होता है  मैंने कभी न जाना
खुद को न मैने पहचाना
अच्छा क्या बुरा क्या ये फर्क न जाना
हमेशा मर-मर के जीती रही
जिंदगी सिमट सी गई
जिंदगी कही भटक सी गई
जाना कहाँ ,कहाँ है मेरी मंजिल न है ठिकाना कोई
पड़ने की उम्र में नर्क सी जिंदगी जीती रही 
 हमेशा मर-मर के जीती रही
हर रोज मौत का मंजर सामने देख कर रहता था यह डर 
न जाने कब मौत से हो सामना इस बात का रहता था डर 
कहीं सुकून की न जिंदगी मिली 
खुद से  क्या शिकायत करें जब अपने ही पथर के मिले 
 हमेशा मर-मर के जीती रही
उनको  अपना दर्द क्या बाँटू 
जो दूसरों को मारने को हमेशा रहते है आतुर
न  कभी होगा  इस बात का गम 
जब तक रहे आसमान में चमन 
जिनको देखूं सबके आँखे रहते है हमेशा नम 
 हमेशा मर-मर के जीती रही
मुझे नहीं किसी बात का अफसोस 
इस अँधेरी दुनियाँ में मेरे बच्चों के   भविष्य का कहाँ करूँ खोज 
अपनी जिंदगी तो अँधेरी बीती पर इन बच्चों के लिए कहाँ ढूंढू उजाला 
ऐ मालिक तुझ पर ही है अब ये आस तुम हो मेरे सदा पास 
 हमेशा मर-मर के जीती रही


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गुरुवार, 8 अगस्त 2019

Jine ki aasha

जीने की मुझमे एक आस है मेरे पास न कुछ खास है 

जीने की मुझमे एक आस है मेरे पास न कुछ खास है 
इस बात का मुझे भी अहसास है 
आसमान के उन तारों को छूने  की  मुझमे एक प्यास है 
जब से आस जगी है तब से ये प्यास जगी  है  
इसके बिना तो जिंदगी अधूरी है 
जीने की मुझमे एक आस है मेरे पास न कुछ खास है 
इस बात का मुझे भी अहसास है
जब तक साँस चलती रहे 
तब तक कुछ कर गुजरने की प्यास थोड़ी सी सदा मुझमे बढ़ती रहे 
इस जिंदगी का क्या भरोसा सांसों की डोरी टूटती रहे 
नयी उमंग के साथ मेरे कदम अपनी मंजिल की ओर हमेशा  बढ़ती रहे 
जीने की मुझमे एक आस है मेरे पास न कुछ खास है 
इस बात का मुझे भी अहसास है
न कुछ खोने का आस है , न कुछ पाने की आस है 
पर न जाने कुछ कर जाने के लिए ये एक अहसास है 
मांगू उस रब से दुआ क्या 
उसके बिना तो ये जीवन ही क्या 
जीने की मुझमे एक आस है मेरे पास न कुछ खास है 
इस बात का मुझे भी अहसास है
जियूं तो किसी नेक दिल के काम आये 
इसी बहाने किसी एक के लब पे मेरा ये नाम आये 
इसी से सायद  जहाँ में नाम तो ये मेरा पहचान आये 
बस इतने ही सी ख्वाब है मेंरे  
जीने की मुझमे एक आस है मेरे पास न कुछ खास है 
इस बात का मुझे भी अहसास है
अपना न है इस जग में कहने को 
किसी के पास न छत  है रात बिताने को
सभी को मिलते है लोग कई बहाने तो 
सभी लगे हुए है एक दूसरे को फसाने को  
जीने की मुझमे एक आस है मेरे पास न कुछ खास है 
इस बात का मुझे भी अहसास है 


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बुधवार, 7 अगस्त 2019

Ghor Andhakar Ho chal rahi bayar ho.

घोर अंधकार हो चल रही  बयार हो 




घोर अंधकार हो चल रही  बयार हो 
चाहे बिजलियाँ कड़क रही हो 
न रुके रुक नहीं न झुके झुके नहीं 
अपने पथ पर चलता रहे  
चाहे आये कई अड़चने 
जैसे फूलों  पर होते है कांटे बुने 
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो 
होकर निस्चल निष्फलक हर तलक 
लेकर अपनी राहो की अड़चनों का सबब 
यही जिन्दगी के गीत है सभी गाते 
जिंदगी जीने की कला है हमको सिखाते 
यही तो हमें अपने हमेशा बताते 
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो 
हर तरफ दिखे धुआं-धुआं सा 
नजर में आये धुंदला -धुंदला सा 
अपने पथ पर चलता  रहूं 
ये गीत आप सभी को सुनाता रहूं 
गमो में भी मुस्कुराता रहूं 
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो
जिंदगी के मस्तियाँ बचपन की  ये गलियां 
चंद्रशेखर ,भगत सिंह ,विवेकानंद 
जिनसे निकले कई हस्तियां 
मिटे  न मिटाये ये है हमारे देश की हस्तियां 
घोर अंधकार हो चल रही बयार हो 


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सोमवार, 5 अगस्त 2019

Ma ke Anchal ke Tale .

माँ के आँचल  के तले  जीवन के ज्योति जले 



माँ के आँचल  के तले  जीवन के ज्योति जले 
माँ के आँचल में रह कर ही मैंने देखा जहाँ 
माँ से बढ़ा न कोई माँ में ही है सब कुछ सारा
जिनके पास है माँ का साया, उसको और इस जहाँ में न कुछ प्यारा
माँ का आशीश पाकर ही, जीवन  धन्य  हो गया हमारा
माँ के आँचल के तले  जीवन के ज्योति जले
तेरे ही चरणों तले  हम पले बड़े
माँ तेरा नाम लेने से लगे भगवन का नाम
यही तो होता है एक माँ की पहचान
जो माँ को न जाने वो क्या माँ को पहचाने
माँ के आँचल  के तले  जीवन के ज्योति जले 
माँ ही दुर्गा ,माँ ही काली, माँ ही है सरस्वती
माँ है तो घर में आशीश है लक्ष्मी का 
गलत करो काली का रूप लेती है 
अपराधी हो तो  दुर्गा बनकर कभी सजा वह देती है 
तो कभी सरस्वती बनकर,ज्ञान की बात वही तो हमें बतलाती है  
माँ के आँचल  के तले जीवन के ज्योति जले 
माँ ही तो हमें जीवन का  मूल मंत्र बताती है 
माँ ही हमारे चरित्र के सही आधार 
माँ के बिना तो बच्चे का  रुक जाये, सृजन का आधार 
माँ से ही बच्चे को मिलती है सही ज्ञान 
 माँ के आँचल  के तले  जीवन के ज्योति जले 


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मंगलवार, 30 जुलाई 2019

Nari sakti hai ......Jivan adhaar

नारी सकती है अपने जीवन का आधार ,इनसे  बना है यह पूरा संसार 


नारी शक्ति  है अपने जीवन का आधार ,इनसे  बना है यह पूरा संसार 
इनसे ही खुशियां आती है , अपने घर  द्वार 
नारी शक्ति से  है स्वाभिमान, का जीवन मूलाधार 
कल्पना ,सुनीता , लक्ष्मीबाई  से देती है अपने  पहचान 
माँ बनकर संवारती सबकी जिंदगी 
नारी शक्ति से एक पहचान बनती 
बेटी बनकर अपने कुल का गौरव बढ़ाती बेटी 
अपने बच्चे को माँ बनकर ज्ञान देती है बेटी 
हर पल अपना धर्म निभाती है ये बेटी 
नारी में छुपा  है ,यह जग सारा 
इनकी सुरक्षा करना ,है कर्त्तव्य हमारा 
इनकी  महत्ता समझे ,यह जग सारा 
नहीं तो मिट जायेगा कभी एक दिन ,यह सुन्दर जग सारा 
इनसे तो बनता है, पहचान हमारा 
इनके बिना कहाँ ,अस्तित्व हमारा 
बचा लो अपनी ,इस शक्ति  को 
न लूटने दो बे आबरू करके ,तमाशा देख रहा यह जग सारा 
ख़ुशियों की प्रतीक है ये 
इनके होने से बना है सुःखी जीवन हमारा 
इनकी एक मुस्कान में छुपा है सुःखी  जीवन का गुण सारा 
नारी शक्ति है अपने जीवन का आधार ,इनसे बना है यह पूरा संसार 
इनसे ही खुशियां आती है , अपने घर द्वार 
इनका करो सदा आदर ,
इनमे छुपा है यह ब्रह्माण्ड सारा
इनकी करो वंदन चरणों में है मुक्ति हमारा 


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रविवार, 28 जुलाई 2019

AI MERE DESH KE TUM VIR JAVAN


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Jamin se ashman tak

जमीं से उस  आसमाँ तक , मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  जमीं से उस  आसमाँ तक ,  मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  शुरू से लेकर अंत तक ,  त...