हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी घर का सम्मान है बेटी
घरों में खुशियां लाती है बेटी
माँ बाप का सम्मान करती है बेटी
घर में हो बेटी तो खुशियोँ से भरा रहता है घर सारा
उनके बिना घर सुना हो जाता है सारा
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
अपने परिवार गौरव बढ़ाती है बेटी
उस कुदरत का अनमोल तौफा है बेटी
घर को धन धान्य रखती है बेटी
जिस घर में हो बेटी
खुशियों को समेटे रखती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
माँ बनकर कभी बच्चों को सिख देती है बेटी
तो कभी शिखिका बनकर ज्ञान की बात बताती बेटी
कभी बेटी बनकर अपने माँ बाप की सेवा करती है बेटी
तो कभी बहु बनकर के घर को सवाँरती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
बेटी है तो सुन्दर है जग सारा
इनके बिना नहीं तो क्या है यहाँ प्यारा
सच कहें तो नौ देवियों का प्रतिरूप है बेटी
इनको करो सदा सम्मान
दो छोटे बड़े सभी को ज्ञान
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
इनकी करो सदा सुरक्षा
तभी तो अपना धरती होगा अच्छा
घर को स्वर्ग बनती है ये बेटी
फूलों की तरह घर को महकाती है बेटी
भवरों के जैसे घर में गुनगुनाती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
सदा करती है ये सभी का सम्मान
सबको मानती है ये एक समान
अन्नपूर्णा की मूरत होती
सरस्वती की सुरत होती है बेटी
सच कहें तो खुशियों को संजोती है ये बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
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हर घर का चाँद है बेटी घर का सम्मान है बेटी
घरों में खुशियां लाती है बेटी
माँ बाप का सम्मान करती है बेटी
घर में हो बेटी तो खुशियोँ से भरा रहता है घर सारा
उनके बिना घर सुना हो जाता है सारा
हर घर का चाँद है बेटी
घरों में खुशियां लाती है बेटी
माँ बाप का सम्मान करती है बेटी
घर में हो बेटी तो खुशियोँ से भरा रहता है घर सारा
उनके बिना घर सुना हो जाता है सारा
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
अपने परिवार गौरव बढ़ाती है बेटी
उस कुदरत का अनमोल तौफा है बेटी
घर को धन धान्य रखती है बेटी
जिस घर में हो बेटी
खुशियों को समेटे रखती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
अपने परिवार गौरव बढ़ाती है बेटी
उस कुदरत का अनमोल तौफा है बेटी
घर को धन धान्य रखती है बेटी
जिस घर में हो बेटी
खुशियों को समेटे रखती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
माँ बनकर कभी बच्चों को सिख देती है बेटी
तो कभी शिखिका बनकर ज्ञान की बात बताती बेटी
कभी बेटी बनकर अपने माँ बाप की सेवा करती है बेटी
तो कभी बहु बनकर के घर को सवाँरती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
माँ बनकर कभी बच्चों को सिख देती है बेटी
तो कभी शिखिका बनकर ज्ञान की बात बताती बेटी
कभी बेटी बनकर अपने माँ बाप की सेवा करती है बेटी
तो कभी बहु बनकर के घर को सवाँरती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
बेटी है तो सुन्दर है जग सारा
इनके बिना नहीं तो क्या है यहाँ प्यारा
सच कहें तो नौ देवियों का प्रतिरूप है बेटी
इनको करो सदा सम्मान
दो छोटे बड़े सभी को ज्ञान
हर घर का चाँद है बेटी
बेटी है तो सुन्दर है जग सारा
इनके बिना नहीं तो क्या है यहाँ प्यारा
सच कहें तो नौ देवियों का प्रतिरूप है बेटी
इनको करो सदा सम्मान
दो छोटे बड़े सभी को ज्ञान
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
इनकी करो सदा सुरक्षा
तभी तो अपना धरती होगा अच्छा
घर को स्वर्ग बनती है ये बेटी
फूलों की तरह घर को महकाती है बेटी
भवरों के जैसे घर में गुनगुनाती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
इनकी करो सदा सुरक्षा
तभी तो अपना धरती होगा अच्छा
घर को स्वर्ग बनती है ये बेटी
फूलों की तरह घर को महकाती है बेटी
भवरों के जैसे घर में गुनगुनाती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी
सदा करती है ये सभी का सम्मान
सबको मानती है ये एक समान
अन्नपूर्णा की मूरत होती
सदा करती है ये सभी का सम्मान
सबको मानती है ये एक समान
अन्नपूर्णा की मूरत होती
सरस्वती की सुरत होती है बेटी
सच कहें तो खुशियों को संजोती है ये बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
सच कहें तो खुशियों को संजोती है ये बेटी
हर घर का चाँद है बेटी
घर का सम्मान है बेटी











