खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में
खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में
रहती वो हमेशा मेरे साथ में
जिसको मैंने ढूंढा इधर- उधर बातों ही बातों मैं
वो तो मिला मुझे मेरे साथ में
इनको कर लू में अपने मुठी में
खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में
न हो भले कोई मेरे साथ में
अपने तक़दीर को भी लिख दूंगा अपने इस हाथ में
न किसी की सुनता करता हूँ अपने आप की में
चाहे वो तक़दीर से भी छीन लूँ
जो छिपा ले इन ऊंच आश्मान में
खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में
तक़दीर कभी नहीं लिखा रहता है हाथों की लकीरों में
वो तो छिपा के हम रकते है अपने मेहनत की लकीरों में
जो चाहते हो उसे हांसिल कर सकते तुम भरोसा रखो इन हाँथों में
न बह जाना कभी किसी के जस्बातों में
खुद की सुनना खुद की करना
न खो जाना किसी के बात में
खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में
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