बुधवार, 28 अगस्त 2019

Article Khud ki takdir apne hath me

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में 




खुद की तक़दीर अपने हाँथ में

 मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

रहती वो हमेशा  मेरे साथ में 

जिसको मैंने ढूंढा  इधर- उधर  बातों ही बातों मैं 

वो तो मिला मुझे मेरे साथ में 

इनको कर लू में अपने मुठी में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में

 मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

न हो भले कोई मेरे साथ में 

अपने तक़दीर को भी लिख दूंगा अपने इस हाथ में 

न किसी की सुनता करता हूँ अपने आप की में 

चाहे वो तक़दीर से भी छीन लूँ 

जो छिपा ले इन ऊंच आश्मान में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में 

मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

तक़दीर कभी नहीं लिखा रहता है हाथों की लकीरों में 

वो तो छिपा के हम रकते है अपने मेहनत  की लकीरों में 

जो चाहते हो  उसे हांसिल कर सकते  तुम भरोसा रखो इन हाँथों में 

न बह जाना कभी किसी के जस्बातों में 

खुद की सुनना खुद की करना 

न खो जाना किसी के बात में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में 

मेरी मंजिल है मेरे साथ में 


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