हम दोनों के रिश्तों की ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
ये फासले भी हो जाते कम अगर तुम सामने होती
आपसे जुदा होने का गम न होती
न मैने कुछ भी उस रब से माँगा
बस इतना माँगा तुम मेरे साथ होती
हम दोनों के रिश्तों की ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
हम दोनों की एक मुलाकात होती
काश तुम मेरे पास होती
हम दोनों के मिलन में रिम -झिम सी बरसात होती
हम दोनों में कुछ ऐसी बात होती
मैं आपके आँखों में देखूँ ,आप मेरे आँखों में खो जाती
हम दोनों के रिश्तों की ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
मेरे हाथों में तेरा हाथ होता
हम दोनों का रिश्ता सदा साथ होता
काले -काले बादलों में कहीं हम खो जाते
तेरे मेरे सपनो में हम खो जाते
तेरे पलकों तले हम चैन यूँ ही सो जाते
हम दोनों के रिश्तों की ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
बेकरारी इस कदर बढ़ गयी तुझसे मिलने को की
तेरी तो हमको परछाई भी नजर कभी नहीं आती
तुझसे हम जो दूर हुए
हम अपने गुरुर से मजबूर हुए
हम दोनों के रिश्तों की ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
न जाने ये कैसी मज़बूरी थी
तुझसे इतनी मेरी दुरी थी
न मैंने खुद को जाना
न तुमको कभी मैंने नहीं पहचाना
हम दोनों के रिश्तों की ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
हम दोनों के रिश्ते थे इतने नाजुक
की चंद पल भी ठहर न पाए
तुझसे दूर होने का गम हमेशा रहेगा
क्योंकि कभी सायद हम ही तुमको समझ नहीं पाए
हम दोनों के रिश्तों की ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
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