शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

Jamin se ashman tak

जमीं से उस  आसमाँ तक , मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 


जमीं से उस  आसमाँ तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
शुरू से लेकर अंत तक ,
 तेरा पीछा करूँगी  वहां तक 
जब तक ये साँस चलेगी तब तक, 
ये जूनून जिन्दा रहेगी  आदि से अंत तक 
 जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
तुमको  हांसिल करने के  उस अंतिम वक्त तक 
मेरा वक्त रहेगा तब तक 
सब कुछ हाँसिल न कर लूँ तब तक 
मेरा ये प्रण रहेगा तब तक 
जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
ये जिंदगी रहेगी तब तक 
मेरी एक मंजिल पैदा होगी तब तक 
आज है ये जिंदगी शायद न बचे कल तक 
बस तो ये जूनून रहेगा उस आखरी तड़फ  तक 
जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 
जिंदगी मेरी बची रहे दूसरे का  दुःख के अंतिम घड़ी  तक 
खुदा के रहमे करम है हम सब तक 
इस  रात की समां बुझने तक 
इस जीवन के अंतिम सासों तक 
जमीं से उस आसमाँ  तक , 
मेरी मंजिल नजर आये वहां तक 



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बुधवार, 4 सितंबर 2019

Time For play our

वक्त का खेल पुराना है ,
खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 



वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

क्या लेकर आये थे क्या लेके जाना है

 हमेशा मुस्कुराते रहना है

 वक्त हर जख्मों को भर देगा बस चलते रहना है

 न तेरा कुछ न मेरा कुछ है 

यहाँ एक दिन इसी मिट्टी में मिल जाना है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

किसी का दिल न दुखाना है 

जो अच्छा है उस काम को  करते जाना है 

जीवन को सड़े बीज मिले या अच्छे 

खुशी से बीज बोते जाना है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

भागवत ,बाइबल ,कुरान इनका मतलब

 किसी को न अलग करना है 

किसी को नीच न माने सबको एक समझना है 

हम एक ही खुदा के बन्दे है 

सदा एक साथ एक ही रहना है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

खुदा भी कहता है मैंने सबको एक माना है 

फिर न जाने क्यों रंग रूप मजहब का यह मैंने भेद बनाया है

 सबको एक और एक ही इंसान बनाया है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

खुद को यूँ न अलग समझ कर चलना है 

सब में भाई चारे की भावना पैदा करना है 

खुशी से एक साथ जिंदगी को हँसते हुए जीना है 

सबको एक और एक ही इंसान बनाया है 

वक्त का खेल पुराना है ,

खाली हाथ आये खाली हाथ जाना है 

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सोमवार, 2 सितंबर 2019

Start first With the ray of sun

सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 





सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
जिंदगी की शुरुवात एक नयी सोच के साथ 
 है राहें नए  पर नयी मंजिल के साथ 
सुबह कि शुरुवात करो एक नयी उमंग के साथ
सोचो अच्छा तो होगा अच्छा सा 
सीधा सा रास्ता हो  सच्चा सा 
 सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
सबका पकड़ के हाथों में हाथ
बढ़ते रहना सभी को लेकर के साथ 
बनाना है हम सबको अपना इतिहास  
पूरा होगा तभी जब होगा सबका साथ 
सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
शामिल रहो  सदा सबके दुःख -सुःख में साथ 
यूँ ही चलते रहना है एक दूसरे के साथ 
एक दूसरे को बताएँ हम हमेशा है तेरे साथ 
हमेशा चलते रहेंगे पकड़ कर के एक-दूसरे का हाथ 
कैसी भी मुश्किल की घड़ी आ जाये न छोड़ेंगे तेरा साथ  
सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 
अपने इरादों के हौसलों से छू लेंगे आसमानों को 
न डरेंगे इस जहाँ के इंसानों को 
चलते रहेंगे हमेशा इस तरह 
ये जहाँ रहे चाहे कैसे भी किस तरह 
सूरज की पहली किरण के साथ
प्यारी सी मुस्कान के साथ 




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शनिवार, 31 अगस्त 2019

Poet For Girls

हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी 




हर घर का चाँद है बेटी घर का सम्मान है बेटी
घरों में खुशियां लाती है बेटी
माँ बाप का सम्मान करती है बेटी
घर में हो बेटी तो खुशियोँ से भरा रहता है घर सारा
उनके बिना  घर सुना हो जाता है सारा
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
अपने परिवार  गौरव बढ़ाती है बेटी
उस कुदरत का अनमोल तौफा है बेटी
घर को धन धान्य रखती है बेटी
जिस घर में हो बेटी
खुशियों को समेटे रखती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
माँ बनकर कभी बच्चों को सिख देती है बेटी
तो कभी शिखिका बनकर ज्ञान की बात बताती बेटी
कभी  बेटी बनकर अपने माँ बाप की सेवा करती है बेटी
तो कभी बहु बनकर के घर को सवाँरती है बेटी
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
बेटी है तो सुन्दर है जग सारा
इनके बिना नहीं तो क्या है यहाँ प्यारा
सच कहें तो नौ देवियों का प्रतिरूप है बेटी
इनको करो सदा सम्मान
दो छोटे बड़े सभी को ज्ञान
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
इनकी करो सदा सुरक्षा
तभी तो अपना धरती होगा अच्छा
घर को स्वर्ग बनती है ये बेटी
फूलों की तरह घर को महकाती है बेटी
भवरों के जैसे घर में गुनगुनाती है बेटी 
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी
सदा करती है ये सभी का सम्मान
सबको मानती है ये एक समान
अन्नपूर्णा की मूरत होती 
 सरस्वती की सुरत  होती है बेटी
सच कहें तो खुशियों को संजोती है ये बेटी
हर घर का चाँद है बेटी 
घर का सम्मान है बेटी  


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बुधवार, 28 अगस्त 2019

Article Khud ki takdir apne hath me

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में
मेरी मंजिल है मेरे साथ में 




खुद की तक़दीर अपने हाँथ में

 मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

रहती वो हमेशा  मेरे साथ में 

जिसको मैंने ढूंढा  इधर- उधर  बातों ही बातों मैं 

वो तो मिला मुझे मेरे साथ में 

इनको कर लू में अपने मुठी में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में

 मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

न हो भले कोई मेरे साथ में 

अपने तक़दीर को भी लिख दूंगा अपने इस हाथ में 

न किसी की सुनता करता हूँ अपने आप की में 

चाहे वो तक़दीर से भी छीन लूँ 

जो छिपा ले इन ऊंच आश्मान में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में 

मेरी मंजिल है मेरे साथ में 

तक़दीर कभी नहीं लिखा रहता है हाथों की लकीरों में 

वो तो छिपा के हम रकते है अपने मेहनत  की लकीरों में 

जो चाहते हो  उसे हांसिल कर सकते  तुम भरोसा रखो इन हाँथों में 

न बह जाना कभी किसी के जस्बातों में 

खुद की सुनना खुद की करना 

न खो जाना किसी के बात में 

खुद की तक़दीर अपने हाँथ में 

मेरी मंजिल है मेरे साथ में 


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मंगलवार, 27 अगस्त 2019

Poet New

हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती






हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
ये फासले भी हो जाते कम अगर तुम सामने होती
आपसे  जुदा  होने का गम न होती  
न मैने कुछ भी  उस रब से माँगा 
बस इतना माँगा  तुम मेरे साथ होती
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
हम दोनों की एक मुलाकात होती 
काश तुम मेरे पास होती 
हम दोनों के मिलन  में रिम -झिम सी बरसात होती 
हम दोनों में कुछ ऐसी बात होती 
मैं आपके आँखों में देखूँ ,आप मेरे आँखों में खो जाती 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
मेरे हाथों में तेरा हाथ होता 
हम दोनों का  रिश्ता  सदा साथ होता 
काले -काले बादलों में कहीं हम खो जाते 
तेरे मेरे सपनो में हम खो जाते 
तेरे पलकों तले हम चैन यूँ ही  सो जाते 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
बेकरारी इस कदर बढ़ गयी तुझसे मिलने को की 
तेरी तो हमको परछाई भी नजर कभी नहीं आती 
तुझसे हम जो दूर हुए 
हम अपने  गुरुर से मजबूर हुए 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
न जाने ये कैसी मज़बूरी थी 
तुझसे इतनी मेरी दुरी थी 
न मैंने खुद को जाना 
न तुमको कभी मैंने नहीं  पहचाना 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती
हम दोनों के रिश्ते थे इतने नाजुक 
की चंद पल भी ठहर न पाए 
तुझसे दूर होने का गम हमेशा रहेगा 
क्योंकि कभी सायद हम ही तुमको  समझ नहीं पाए 
हम दोनों के रिश्तों की  ये दुरी न होती
मेरी सायद कोई ऐसी मज़बूरी न होती


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रविवार, 25 अगस्त 2019

Poet

कल भी वक्त मेरा था आज भी वक्त मेरा है 





 कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है 
जीवन में न कुछ तेरा है ,न कुछ मेरा है 
खली हाथ आये थे खली हाथ जाना है 
किश्मतों के मारे थे , न किसी के सहारे थे 
कल तो तेरे दिन अच्छे थे आज तो मेरे है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
हम तो खुद से गिर कर खड़े हो जाते है 
न किसी के कल सहारे थे  न आज किसी के सहारे है 
किस्मतों के लेख को क्या माने हम 
हम तो खुद की किस्मत लिखते है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
न कोई कहने को अपना कोई न कोई कहने को पराया है 
आँख खुली तो पता चला की ये तो सब सपना है न कोई यहाँ मेरा है 
न कोई जंजीरों से मेरे सपने न बंधे हो 
बेपरवा होके आसमान के तारों को छुए हो 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है
अपनो की क्या बात करते हो आप 
समय पर साथ छोड़ जाता है अपना साया है 
न कोई हो धर्म का बंधन  सबको अपना मानकर हम तो जीते है 
हम तो बस हमेशा सर उठाकर जीते है 
कल भी वक्त मेरा था ,आज भी वक्त मेरा है

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Jamin se ashman tak

जमीं से उस  आसमाँ तक , मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  जमीं से उस  आसमाँ तक ,  मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  शुरू से लेकर अंत तक ,  त...