शनिवार, 24 अगस्त 2019

love poet

रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि 


रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि तेरे चाहत में हम इतने डूबे गए की खुद को पहचानना बाकि है तेरे जाने का गम इतना था की, दिन भी हमें रात लगने लगती है यह वक्त मेरे बस का नहीं तो , तुझे अपना भी बनाना अभी बाकि है तुझसे मेरी सुबह हो और तुझसे मेरी शाम होना बाकि है  रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि न खुद का  फ़िक्र था कभी,  बस मेरी चाहत  दिल में थी दबी जब मेरे पास थी वो पर केह न पाया कभी तेरे जाने का गम तब भी था तेरे जाने का गम आज भी है रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि पर तेरे लिए प्यार तब भी था बाकि और तेरे लिए प्यार आज भी बाकि तेरे प्यार का आलम ये है की हर पल थोड़ा जीने की आस आज भी है बाकि थोड़ा तेरे साथ जीने की हशरत कल भी था  थोड़ा बाकि रात अभी बाकि है , हाथों में जाम अभी बाकि 

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बुधवार, 21 अगस्त 2019

ARTICLE JIVAN ME RAHEN KHUD BANATI HAI

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जीवन में राहें खुद बनाती है 
मंजिल भी खुद ढूँढ लेती है  
रास्ते  चाहे कैसे भी होती है ,अपने उड़ने की ताकत ढूँढ लेती है  
रास्ते कैसे भी क्यों न हो, रास्ते की हमराही ढूँढ लेती है  
खुद पर हो अगर fo”okl तो  मंजिल भी विनर ढूँढ लेती है 
जीवन में राहें खुद बनाती है
जिसको मंजिल की तलाश हो ,उसे नींद कभी न आती है 
कड़ी मेहनत से ही मंजिल मिलती 
नहीं तो बिना मेहनत कुत्ते को भी रोटी नहीं मिलती है 
अपने इरादे रखो नेक ,मंजिल भी साथी ढूँढ लेती है 

जीवन में राहें खुद बनाती है


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रविवार, 18 अगस्त 2019

Din par din dhalti rahi ..

दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही





दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही
न वो आये ,न उनकी खबर आयी
अँधेरे में पड़ी जिन्दगी भी, उजाले की तलाश करती रही
अपनों को क्या देखूँ  में ,खुद को हमेशा निहारती रही
न जाने कब वो आयेंगे, ये सोचकर खुद को मैं सवाँरती रही
दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही
जब वो गए मानो ,जीने की वजह भी साथ गयी
न लौट कर आये वो ,न उनकी कोई सन्देश आयी
घर पर राह तकते ,साँसें हमेशा दम तोड़ती रही
उनके एक बार मिलने प्यास में ,साँसें थोड़ी  रूक सी गयी
दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही
सास ससुर की सेवा करूँ, इनके चरणों में पड़ी रही
आखरी वक्त में भी, बेटे को देखने की उनकी आस बढ़ती रही
सोंचे न होंगे वे कभी पास मेरे ,उसकी परछाई भी न होगी
यादें होंगी उनकी  साथ मेरी  पर ,ऑंखें उनको  देखने को तरसती रही 
 दिन पर दिन ढलती रही ,मेरी ऑंखें नम होती रही

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शुक्रवार, 16 अगस्त 2019

Suraj se maine chamakna sikha .

सूरज से मैंने चमकना सीखा फूलों से महकना सीखा 








सूरज से मैंने चमकना सीखा , फूलों से महकना सीखा 
भौरों से गाना सीखा , पंछियों से चहकना सीखा 
वनों से मैंने सुंदरता सीखा 
धर्मों से सबको एक करना सीखा 
शिक्षा से मैंने ज्ञान सीखा 
जिंदगी में काँटों से भरे राहों को पार करना सीखा 
पानी के बहाव से मैंने हमेशा बहते रहना सीखा 
मिटटी से जीवन को सृजन करना सीखा 
प्रकृति से मैंने बदलाव सीखा 
हवा से मैंने हमेशा गतिशील होते रहना सीखा 
आग से मैंने अपने अंदर की बुराई को जलना सीखा 
बारिश से मैंने जिंदगी की अच्छाई से जीवन को सींचना सीखा 
बड़ों से मैंने अपने से अनुजों को प्रेम करना सीखा 
जीवन के सफर में गिर -कर उठना सीखा 
आसमान  ऊँचाई से मैंने ,हमेशा ऊपर उठना सीखा 
हार कर जिंदगी से मैंने जीतना सीखा 
गम से भरे आँसुओं से मैंने फिर से हँसना सीखा 
रंगों से जीवन के विरान भरे जिंदगी  को रंगना सीखा 
समय से मैंने अपने आप को बदलना सीखा 
सागर से मैंने हर मुश्किलों को पार करना सीखा 

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मंगलवार, 13 अगस्त 2019

Guruvar hame do yah gyan .

गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान 


























गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान
तेरे ही चरणों में है पूरे चारों धाम
आपका आशीष पाकर बने, परमहंश और विवेकानंद जैसे महान 
दो हमें यह मूल मंत्र दो हमें ज्ञान 
माता पिता को ही अपना माने भगवान 
इनकी सेवा में लगा रहे हमारा सदा ध्यान 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान
इस धरा पर तीनों  ही ऐसे है ,जिनके चरणों में ही समाये तीनों लोको के भगवान 
गुरु और माता-पिता इस धरा के, सच्चे प्रतिक है भगवान 
सुबह उठ-कर करो इनका ध्यान 
उसके पश्चात् करो, अपना नित काम 
हर काम शुभ हो जायेगा ,इनका लेके नाम 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान  
जो इनको न समझे अपना  मान  सम्मान 
जरा सा दिल का भी कहना मान 
इनको भी थोड़ा पहचान 
इनसे ही है सोहरत तेरी ,इसी ही छिपी गरिमा तेरी 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान  
माता - पिता और  गुर  की  सेवा ,  का करो तन- मन से ध्यान 
कहाँ ढूंढता रहता  है दर -बदर  घर पे ही रहते है सदा तेरे भगवान 
माँ को देवी मानो पिता को देव और, गुरु है ऋषियों के अंशदान 
इनसे ही दिक्ष्या पाकर बने सूरदास और संत कबीर जैसे महान 
गुरुवर हमें दो यह ज्ञान ,सदा रहे आपके चरणों में हमारा ध्यान  

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रविवार, 11 अगस्त 2019

Jeevan ek Safar .

                       जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर




जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
इधर -से -उधर भटकते रहें  ,मन ले जाये जिधर 
चलते रहना न रुकना ,यही है जिंदगी का सफर
होकर -बेखबर - बेअसर  ,चलते रहो मंजिल हो जिधर 
जिंदगी से सिखो यह सबक 
न रुकना कभी ,मुश्किलें आ जाये जब आप पर 
जिंदगी लेती है इन्तेहाँ हमेशा 
कौन कैसा  इसकी  हमें है ,हर पल की खबर
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
मुश्किलों से जो घबराओगे 
मंजिल न आएगी ,तुम्हें कभी नजर 
भटकाना इसका काम यही 
सबकी खबर ले यही,घर -घर करके सफर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
कंकड़ मिले या पत्थर, करते रहो इसमें  सफर 
राहों में भी मिलेंगे फूल और कभी पत्थर 
 जीवन में कभी सुःख आएंगे कभी दुःख 
इन सभी से लड़ने के लिए, सदा रहो तत्पर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
दुःख भी आता ग्रहण की तरह कुछ पहर 
ये भी हट जाता है ,कुछ -समय  कुछ- पहर 
कब कहाँ क्या हो जाये, इसकी नहीं किसी को खबर 
कभी -इधर तो कभी -उधर ,जीवन का  यही तो है सफर 
मुश्किलों से लड़ने  के लिए ,रास्ते पे खड़े रहो डटकर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
इनसे लड़ो सदा हँसकर 
जिंदगी का यही उसूल चलते रहो हमेशा  मुस्कुराकर 
आज यहाँ है न जाने ,कल हो किधर 
जीने का रास्ता ही ,बदल जायेगा 
इतना भरोशा  रख ले ,जरा सा खुदपर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
खुशियाँ  कदम चुम लेंगी ,तुम्हारे जब दर  पर 
सावन की बारिश की तरह, बरस पड़ेंगे तुम पर 
कुछ न आता था हमें नजर 
न कोई मंजिल थी, सोचते थे जाएँ किधर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर
बिना कोई मंजिल के, चलते थे रास्ते पर 
ऐसा लागत था हमें सच में ,हम तो है एक  पत्थर 
जो भटक रहा है, बिना मंजिल के इधर- से- उधर 
जब हम उनसे रूबरू हुए तो, हमने सोचा चलते रहना है सदा इसपर 
जब तक हमें मंजिल मिल न जाये इस पथ -पर 
जीवन एक सफर, आज यहाँ कल किधर    .........,,,,    



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शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

Hamesha mar mar ke Jiti rahi .

  हमेशा मर-मर के जीती रही ,अपने ही घर में मै सिमट कर सोती रही



हमेशा मर-मर के जीती रही
अपने ही घर में मै सिमट कर सोती रही
आजादी क्या होता है  मैंने कभी न जाना
खुद को न मैने पहचाना
अच्छा क्या बुरा क्या ये फर्क न जाना
हमेशा मर-मर के जीती रही
जिंदगी सिमट सी गई
जिंदगी कही भटक सी गई
जाना कहाँ ,कहाँ है मेरी मंजिल न है ठिकाना कोई
पड़ने की उम्र में नर्क सी जिंदगी जीती रही 
 हमेशा मर-मर के जीती रही
हर रोज मौत का मंजर सामने देख कर रहता था यह डर 
न जाने कब मौत से हो सामना इस बात का रहता था डर 
कहीं सुकून की न जिंदगी मिली 
खुद से  क्या शिकायत करें जब अपने ही पथर के मिले 
 हमेशा मर-मर के जीती रही
उनको  अपना दर्द क्या बाँटू 
जो दूसरों को मारने को हमेशा रहते है आतुर
न  कभी होगा  इस बात का गम 
जब तक रहे आसमान में चमन 
जिनको देखूं सबके आँखे रहते है हमेशा नम 
 हमेशा मर-मर के जीती रही
मुझे नहीं किसी बात का अफसोस 
इस अँधेरी दुनियाँ में मेरे बच्चों के   भविष्य का कहाँ करूँ खोज 
अपनी जिंदगी तो अँधेरी बीती पर इन बच्चों के लिए कहाँ ढूंढू उजाला 
ऐ मालिक तुझ पर ही है अब ये आस तुम हो मेरे सदा पास 
 हमेशा मर-मर के जीती रही


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Jamin se ashman tak

जमीं से उस  आसमाँ तक , मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  जमीं से उस  आसमाँ तक ,  मेरी मंजिल नजर आये वहां तक  शुरू से लेकर अंत तक ,  त...